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Sunday, September 27, 2020

What sounds extremely wrong, but is actually correct?

Brushing your teeth after you wake up in morning is not ideal.

When Doctors say you should brush twice a day they mean that you should brush after your breakfast and dinner.

After you eat a meal or snack that contains sugar, the bacteria in plaque produce acids that attack tooth enamel. When you brush your teeth, you help remove food and plaque - a sticky white film that forms on your teeth and contains bacteria.

So if you don't brush your teeth after dinner then bacteria destroy your teeth all night (8 hours) and if you don't brush your teeth after breakfast then again they will again desintegrate your teeth all day.

If you brush your teeth after breakfast your mouth will be fresh till lunch and brushing your teeth after dinner will keep your mouth fresh all night and you don't even have to brush teeth after waking up in the morning till breakfast. Your teeth can afford time between lunch & dinner without brushing.

Understand this & aware others.

Sincerely

Please follow for more such information.

Source : Rajesh Sodhi (MBBS from PGIMS Rohtak)

Monday, September 21, 2020

जीवन के चमत्कारी रहस्य क्या हैं ?

आदमी कितना जीता है? 70 या 80 साल। बहुत अच्छी सेहत हुई तो 100 साल। इन 100 वर्षों में वह प्रारंभिक 25 वर्ष तो संसार, खुद को समझने और करियर बनाने में ही लगा देता होगा। अगले 25 वर्ष वह गृहस्थ जीवन के संघर्ष में गंवा देता होगा और अंत में सोचता होगा कि अब जिया जाए या शायद सोचता होगा कि अब सुकून से जीना चाहता हूं? हालांकि यह सोच काल और परिस्थिति के अनुसार सभी की अलग-अलग हो सकती है।

आजकल जीवन प्रबंधन के बारे में भी बहुत सुनने को मिलता है, लेकिन कितने लोग हैं, जो अपने जीवन का प्रबंधन कर सकते हैं? क्या सचमुच जीवन प्रबंधन करने के बाद जीवन वैसे ही चलता है? हालांकि उपरोक्त लिखी गईं सभी बातें व्यर्थ हैं। हम आपको बताएंगे कि किस तरह आपका जीवन संचालित होता है और आखिर क्या है जीवन का सही रहस्य। हम आपको जीवन रहस्यों के बारे में बता रहे हैं। उस पर आप अकेले में गंभीरता से विचार करना तो हो सकता है कि वह आपको समझ में आ जाए। हालांकि अधिकतर लोग पहले से ही समझदार हैं। हम उन्हें क्या समझाएं, वे दिनभर फेसबुक, ब्लॉग और ट्विटर पर अपने ज्ञान को प्रदर्शित करते ही रहते हैं।

निरोगी काया : यदि आप स्वस्थ हैं तो ही आपका जीवन है। अस्वस्थ काया में जीवन नहीं होता। व्यक्ति 4 कारणों से अस्वस्थ होता है : पहला मौसम-वातावरण से, दूसरा खाने-पीने से, तीसरा चिंता-क्रोध से और चौथा अनिद्रा से।

मौसम और वातावरण आपके वश में नहीं, लेकिन घर और वस्त्र हों ऐसे कि वे आपको बचा लें। घर को आप वस्तु अनुसार बनाएं। हवा और सूर्य का प्रकाश भीतर किस दिशा से आना चाहिए, यह तय होना चाहिए ताकि वह आपकी बॉडी पर सकारात्मक प्रभाव डाले।

खाना-पीना आपके हाथ में है अत: उत्तम भोजन और उत्तम जल जरूरी है। हर तरह के नशे से दूर रहने की बात भी आप जानते ही होंगे। आहार के साथ उपवास भी जरूरी है। उपवास के लिए विशेष दिन और माह नियुक्त हैं।

चिंता और क्रोध करने की भी आदत हो जाती है शराब पीने की तरह। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि नशा करके व्यक्ति चिंता में तो हो ही जाता है और वह चिड़चिड़ा भी हो जाता है। ये दोनों ही आदतें आपके शरीर को जल्द से जल्द बूढ़ा बना देंगी और साथ ही आप अपने परिवार को भी खो देंगे।

अब जहां तक चौथे कारण का सवाल है, ऐसे में कहना होगा कि उपरोक्त तीन है तो चौथा हो ही जाएगा। उत्तम नींद संजीवनी दवा के समान होती है। मानसिक द्वंद्व, चिंता, दुख, शोक, अनावश्यक बहस, अनावश्यक विचार आदि सभी से श्वासों की गति अनियंत्रित हो जाती है जिसके चलते नींद उड़ जाती है। इससे मुक्ति का सरल उपाय है प्राणायाम और ध्यान। हालांकि आप और कुछ भी कर सकते हैं।

आपने दुनियाभर की किताबें पढ़ी होंगी या घर में रखी होंगी, लेकिन क्या आपके घर में ऐसी किताबें हैं, जो आपको सेहतमंद और चिंत्तामुक्त बने रहने के उपाय बताती हों? जीवनभर आपने स्कूल और कॉलेज में जो पढ़ा है और कठिन मेहनत करके जो कमाया है, वह अस्पताल में जाकर सब व्यर्थ सिद्ध हो जाने वाला है।

आपको घर में रखना चाहिए घरेलू नुस्खों की कई किताबें, आयुर्वेद और योग से संबंधित किताबें, सीडी आदि। इसके अलावा सबसे जरूरी वे किताबें है जिनके माध्यम से आपको आपके शरीर और दवाओं का ज्ञान होता हो। आपके शरीर के भीतर के अंग कौन-कौन-से हैं और वे किस तरह कार्य करते हैं और उन्हें कौन-से भोजन और व्यायाम की जरूरत है, यह भी जानना जरूरी है। हालांकि आप फेसबुक पर चलने वाली व्यर्थ की बातें जानने में ज्यादा उत्सुक रहते होंगे?

चाहें तो योग करें, पैदल चलें, तैराकी करें या कसरत करें। 24 घंटे में से 1 घंटा शरीर को स्वस्थ रखने के लिए देना चाहिए। जिस शरीर में आपको 70-80 साल रहना है, निश्‍चित ही आप उसके लिए कुछ तो करेंगे। यदि यह नहीं कर पाएं तो कम से कम उसके भीतर कचरा तो मत डालिए।

जेब में हो माया : हमारे ऋषि-मुनि कह गए हैं, 'पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख जेब में हो माया।' धन कमाना जीवन में बहुत जरूरी होता है और सभी यह कार्य करते भी हैं। कुछ लोग कड़ी मेहनत करके धन कमाते हैं और कुछ लोग स्मार्ट वर्क करके धन कमाते हैं। धन कमाने के अच्छे रास्ते भी हैं और बुरे भी।

अच्छे रास्ते से कमाया गया धन ही आपके जीवन को संतुष्ट कर सकता है अन्यथा आप शायद नहीं जानते हैं कि बुरे रास्ते का धन बुराई में ही समाप्त हो जाता है। ऐसे लोग जेलखाने, दवाखाने या पागलखाने में ही मिलते हैं।

धनवान बनने के गुप्त रहस्य के बारे में जानने से अच्छा है कि आप प्रैक्टिकल तरीके से इसके बारे में सोचें। हालांकि लोग कहते हैं कि अपार धन कमाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता और सारे शॉर्टकट मार्ग जेल में जाकर ही खत्म होते हैं। लेकिन यह भी सही है कि आपका मार्ग सही है, तो उसे शॉर्टकट बनाया जा सकता है।

आपकी योग्यता ही सबसे बड़ी दौलत है। आप जितने योग्य और कार्यकुशल होंगे, आपके मार्ग की बाधाएं समाप्त होती जाएंगी। धन कमाने के शॉर्टकट मार्ग वे ही लोग ढूंढते हैं, जो अयोग्य हैं। आप सीखें वह सब कुछ जिसके माध्यम से धन कमाया जा सकता है। योग्य व्यक्ति की संसार को जरूरत है।

जैसी सोच, वैसा भविष्य : भगवान बुद्ध कहते हैं कि आज आप जो भी हैं, वह आपके पिछले विचारों का परिणाम है। विचार ही वस्तु बन जाते हैं। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि हम जैसा सोचते हैं, वैसे ही भविष्य का निर्माण करते हैं। यही बात 'दि सीक्रेट' में भी कही गई है और यही बात धम्मपद, गीता, जिनसूत्र और योगसूत्र में कही गई है। इसे आज का विज्ञान 'आकर्षण का नियम' कहता है।

संसार को हम पांचों इंद्रियों से ही जानते हैं और कोई दूसरा रास्ता नहीं। जो भी ग्रहण किया गया है, उसका मन और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उस प्रभाव से ही 'चित्त' निर्मित होता है और निरंतर परिवर्तित होने वाला होता है। इस चित्त को समझने से ही आपके जीवन का खेल आपको समझ में आने लगेगा। अधिकतर लोग अब इसे समझकर अच्‍छे स्थान, माहौल और लोगों के बीच रहने लगे हैं। वे अपनी सोच को बदलने के लिए ध्यान या पॉजिटिव मोटिवेशन की क्लासेस भी जाने लगे हैं।

वैज्ञानिक कहते हैं कि मानव मस्तिष्क में 24 घंटे में लगभग 60,000 विचार आते हैं। उनमें से ज्यादातर नकारात्मक होते हैं। नकारात्मक विचारों का पलड़ा भारी है तो फिर भविष्य भी वैसा ही होगा और यदि ‍मिश्रित विचार हैं तो मिश्रित भविष्य होगा। अधिकतर लोग नकारात्मक फिल्में, न्यूज, सीरियल और गाने देखते रहते हैं इससे उनका मन और मस्तिष्क वैसा ही निर्मित हो जाता है। वे गंदे या जासूसी उपन्यास पढ़कर भी वैसा ही सोचने लगते हैं। आजकल तो इंटरनेट हैं, जहां हर तरह की नकारात्मक चीजें ढूंढी जा सकती हैं। न्यूज चैनल दिनभर नकारात्मक खबरें ही दिखाते रहते हैं जिन्हें देखकर सामूहिक रूप से समाज का मन और मस्तिष्क खराब होता रहता है।

जैसी मति, वैसी गति : 3 अवस्थाएं हैं- 1. जाग्रत, 2. स्वप्न और 3. सुषुप्ति। उक्त 3 तरह की अवस्थाओं के अलावा हमने और किसी प्रकार की अवस्था को नहीं जाना है। जगत 3 स्तरों वाला है- एक, स्थूल जगत जिसकी अनुभूति जाग्रत अवस्था में होती है। दूसरा, सूक्ष्म जगत जिसका हम स्वप्न में अनुभव करते हैं तथा तीसरा, कारण जगत जिसकी अनुभूति सुषुप्ति में होती है।

उक्त तीनों अवस्थाओं में विचार और भाव निरंतर चलते रहते हैं। जो विचार धीरे-धीरे जाने-अनजाने दृढ़ होने लगते हैं और वे धारणा का रूप धर लेते हैं। चित्त के लिए अभी कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है लेकिन मान लीजिए कि आपका मन ही आपके लिए जिन्न बन जाता है और वह आपके बस में नहीं है, तब आप क्या करेंगे?

धारणा बन गए विचार ही आपके स्वप्न का हिस्सा बन जाते हैं। आप जानते ही हैं कि स्वप्न तो स्वप्न ही होते हैं, उनका हकीकत से कोई वास्ता नहीं फिर भी आप वहां उस काल्पनिक दुनिया में उपस्थित होते हैं।

इसी तरह बचपन में यदि यह सीखा है कि आत्मा मरने के बाद स्वर्ग या नर्क में जाती है और आज भी आप यही मानते हैं तो आप निश्‍चित ही एक काल्पनिक स्वर्ग या नर्क में पहुंच जाएंगे। यदि आपके मन में यह धारणा बैठ गई है कि मरने के बाद व्यक्ति कयामत तक कब्र में ही लेटा रहता है, तो आपके साथ वैसा ही होगा। हर धर्म आपको एक अलग धारणा से ग्रसित कर देता है। हालांकि यह तो एक उदाहरण भर है। धर्म आपके चित्त को एक जगह बांधने के लिए निरंतर कुछ पढ़ने या प्रार्थना करने के लिए कहता है ताकि आप समूह के आकर्षण में बंधकर उसे ही सच मानने लगो।

वैज्ञानिकों ने आपके मस्तिष्क की सोच, कल्पना और आपके स्वप्न पर कई तरह के प्रयोग करके जाना है कि आप हजारों तरह की झूठी धारणाओं, भय, आशंकाओं आदि से ग्रसित रहते हैं, जो कि आपके जीवन के लिए जहर की तरह कार्य करते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि भय के कारण नकारात्मक विचार बहुत तेजी से मस्तिष्क में घर बना लेते हैं और फिर इनको निकालना बहुत ही मुश्किल होता है।

जाति स्मरण : हालांकि यह एक ऐसी बात है जिस पर आप ध्यान न भी देंगे तो भी आपके जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, लेकिन ऐसी भी जानकारी होना चाहिए इसीलिए इसे यहां लिखा जा रहा है।

हमारा संपूर्ण जीवन स्मृति-विस्मृति के चक्र में फंसा रहता है। आप खुद या दूसरों को भी यादों के माध्यम से ही जान पाते हों। उम्र के साथ स्मृति का घटना शुरू होता है, जो कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है अगले जन्म की तैयारी के लिए।

यदि मोह-माया या राग-द्वेष ज्यादा है, तो समझो स्मृतियां भी मजबूत हो सकती हैं। व्यक्ति स्मृति-मुक्त तभी होता है जबकि प्रकृति उसे दूसरा गर्भ उपलब्ध कराती है, लेकिन पिछले जन्म की सभी स्मृतियां बीज रूप में कारण शरीर के चित्त में संग्रहीत रहती हैं। विस्मृति या भूलना इसलिए जरूरी होता है कि यह जीवन के अनेक क्लेशों से मुक्ति का उपाय है।

कैसे जानें पूर्व जन्म को : योग में पूर्व जन्म ज्ञान सिद्धि योग के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसे जाति स्मरण का प्रयोग भी कहा जाता है। इस योग की साधना करने से व्यक्ति को अपने अगले-पिछले सारे जन्मों का ज्ञान होने लगता है। योग कहता है कि ‍सर्वप्रथम चित्त को स्थिर करना आवश्यक है तभी इस चित्त में बीज रूप में संग्रहीत पिछले जन्मों का ज्ञान हो सकेगा। चित्त में स्थित संस्कारों पर संयम करने से ही पूर्व जन्म का ज्ञान होता है। चित्त को स्थिर करने के लिए सतत ध्यान क्रिया करना जरूरी है।

ध्यान को जारी रखते हुए आप जब भी बिस्तर पर सोने जाएं, तब आंखें बंद करके उल्टे क्रम में अपनी दिनचर्या के घटनाक्रम को याद करें। जैसे सोने से पूर्व आप क्या कर रहे थे? फिर उससे पूर्व क्या कर रहे थे? तब इस तरह की स्मृतियों को सुबह उठने तक ले जाएं।

दिनचर्या का क्रम सतत जारी रखते हुए 'मेमोरी रिवर्स' को बढ़ाते जाएं। ध्यान के साथ इस जाति स्मरण का अभ्यास जारी रखने से कुछ माह बाद जहां मेमोरी पॉवर बढ़ेगा, वहीं नए-नए अनुभवों के साथ पिछले जन्म को जानने का द्वार भी खुलने लगेगा।

स्वाध्याय : स्वाध्याय का अभ्यास आपको मनचाहा भविष्य देता है। स्वाध्याय का अर्थ है स्वयं का अध्ययन करना, अच्छे विचारों का अध्ययन करना और इस अध्ययन का अभ्यास करना।

आप स्वयं के ज्ञान, कर्म और व्यवहार की समीक्षा करते हुए पढ़ें वह सब कुछ जिससे आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हो, साथ ही आपको इससे खुशी ‍भी मिलती हो। तो बेहतर किताबों को अपना मित्र बनाएं।

जीवन को नई दिशा देने की शुरुआत आप छोटे-छोटे संकल्प से कर सकते हैं। संकल्प लें कि आज से मैं बदल दूंगा वह सब कुछ जिसे बदलने के लिए मैं न जाने कब से सोच रहा हूं। अच्छा सोचना और महसूस करना स्वाध्याय की पहली शर्त है।

ईश्वर प्राणिधान : वेद कहते हैं कि सिर्फ एक ही ईश्वर है जिसे ब्रह्म या परमेश्वर कहा गया है। इसके अलावा और कोई दूसरा ईश्वर नहीं है। ईश्वर निराकार है, यही अद्वैत सत्य है। ईश्वर प्राणिधान का अर्थ है- ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण, ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास। न देवी, न देवता, न पीर-फकीर, न ज्योतिष और न ही गुरु घंटाल। यदि आप मर्द हो तो राहू, केतु या शनि से डरने की जरूरत नहीं। हाथ की अंगूठियां और गले का ताबीज निकालकर फेंक दें। वेद कहते हैं कि असुरक्षा से ही जीवन पैदा होता है और आत्मा बलवान बनती है।

एक ही ईश्वर के प्रति अडिग रहने वाले के मन में दृढ़ता आती है। यह दृढ़ता ही उसकी जीत का कारण है। चाहे सुख हो या घोर दुःख, उसके प्रति अपनी आस्था को डिगाएं नहीं। इससे आपके भीतर पांचों इन्द्रियों में एकजुटता आएगी और लक्ष्य को भेदने की ताकत बढ़ेगी। वे लोग जो अपनी आस्था बदलते रहते हैं, भीतर से कमजोर होते जाते हैं।

विश्वास रखें सिर्फ 'ईश्वर' में, इससे बिखरी हुई सोच को एक नई दिशा मिलेगी और जब आपकी सोच सिर्फ एक ही दिशा में बहने लगेगी तो वह धारणा का रूप धर उसकी तस्वीर ब्रह्मांड में ईश्वर के पास पहुंच जाएगी। ईश्वर उस तस्वीर को मूर्तरूप देकर आपके पास लौटा देगा। ब्रह्मांड में दूरस्थ स्थित ब्रह्म ही सत्य है।

अभ्यास :

करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।

रसरी आवत-जात के, सिल पर परत निशान।।

अभ्यास के बल पर मूर्ख भी बुद्धिमान हो जाता है, अज्ञानी भी ज्ञानी हो जाता है। इतिहास साक्षी है कि अभ्यास एवं परिश्रम के बल पर असंभव दिखाई देने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं। ऋषि-मुनियों की सिद्धियां, वैज्ञानिकों के आविष्कार, राजाओं की विजय गाथाएं- सब इसी का प्रमाण हैं कि यदि मनुष्य हिम्मत न हारे और निरंतर अभ्यास और प्रयास करता रहे तो फिर 'असंभव' शब्द के लिए कहीं स्थान नहीं। बार-बार एक ही काम को कर उसमें निपुण होने का प्रयास ही अभ्यास है।

अभ्यास एक ऐसा माध्यम है जिससे कठिन से कठिन कार्य में कुशलता पाई जा सकती है। जीवन में आप जो भी अच्छा जानते हैं और करना चाहते हैं, उसका अभ्यास करते रहिए। जीवन में अभ्यास की लगातार जरूरत पड़ती रहती है।

आप यदि शुरुआत में प्रतिदिन मन मारकर रोज 6 बजे उठते हैं तो कुछ दिनों बाद 6 बजे उठने का आपको अभ्यास हो जाता है। बाद में यदि आप न भी उठेंगे तो आपकी नींद ठीक 6 बजे ही खुल जाएगी। इसी तरह जन्म और मृत्यु आपके अभ्यास का ही परिणाम है। जिंदगीभर आप किस तरह जिए? अनुशासन में जिये या कि अराजक तरीके से? आपके इस तरीके के अभ्यास से ही आपकी मृत्यु होगी अर्थात अंत में परिणाम निकलेगा। अच्छे अंत से अच्छी शुरुआत भी होती है और अच्छी शुरुआत से अच्छा अंत।

जन्म और मृत्यु के रहस्य को समझना है, तो आप वर्तमान में जी रहे जीवन को समझें। आपकी आदतें, कर्म, अभ्यास, विचार आदि सभी चित्त में इकट्ठे हो रहे हैं। सभी के सम्मिलित प्रभाव से ही परिणाम निकलेगा। आपकी नींद खुलने का जब समय होता है, अधिकतर मौके पर तब ही आपके जन्म लेने का समय होगा इसलिए अभ्यास के महत्व को समझें। पुराने लोग अपनी दिनचर्या को सुधारते थे और उसी के अनुसार जीवन-यापन करते थे।

अभ्यास का महत्व समझें। अभ्यास व्यक्ति को परिपूर्ण और योग्य बनाता है। ऑफिस में, घर में या अन्य कहीं पर भी आप कोई-सा भी कार्य कर रहे हैं, उसे मन लगाकर करना जरूरी है। कोई-सा भी कर्म खाली नहीं जाता है। अभ्यास का अर्थ है- एक ही प्रक्रिया को बार-बार, निरंतर दोहराना। दोहराने की इस प्रक्रिया के चलते त्रुटियां होने की गुंजाइश समाप्त हो जाती है। अच्छा अभ्यास करें।

सांप्रदायिकता और साम्यवाद से बचें : ये दोनों ही तरह की विचारधाराएं जीवन और देश विरोधी हैं। यदि आप अपने जीवन, अपने परिवार और अपने देश से प्यार करते हैं तो इन घातक विचारधाराओं से बचें। आपके द्वारा फैलाई गए सांप्रदायिक विचार से देश का भला नहीं होगा। आप धार्मिक विचार फैलाने के लिए स्वतंत्र हैं। धार्मिक होना और सांप्रदायिक होना दोनों अलग-अलग बातें हैं। धार्मिक बनने के लिए कथित रूप से किसी धर्म, संप्रदाय या संगठन की जरूरत नहीं होती। संगठन विचारधाराओं के होते हैं। धर्म और साम्यवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

विचारधाराएं दो तरह की होती हैं- एक भ्रमपूर्ण और दूसरी स्पष्ट। स्पष्ट विचारधारा में कायदे, हुक्म और पाबंदियां होती हैं, जबकि भ्रमपूर्ण विचारधारा खुद को लोकतांत्रिक और सहिष्णु मूल्यों को प्रस्तुत कर लोगों को कन्फ्यूजन और निर्णयहीनता की स्थिति में डाल देती है। ऐसे व्यक्ति के मन में अराजक और कमजोर विचार होते हैं। कन्फ्यूज मस्तिष्क में दृढ़ता नहीं, भय और शंका ही हो सकती है।

साम्यवादी विचारधारा अमीर और गरीबों के नाम पर उनके बीच एक साफ लकीर खींचकर लोगों को लोगों के खिलाफ खड़ा करती है। इस तरह से यह विचारधारा इस बात का एहसास दिलाती है कि वे एक एलीट-ग्रुप का हिस्सा हैं, जो दुनिया को बचाने का काम कर रहे हैं। दुनिया तभी बचेगी, जब सभी लोग समान हो जाएंगे। इस विचारधारा में आदमी मानसिक गुलाम होता है जिस पर वह गर्व करता है। गुलाम बनने में गर्व महसूस करवाना ही इस विचारधारा का उद्देश्य रहता है। लोगों को गरीब बनाकर रखने में ही इस विचारधारा का फायदा है। साम्यवाद व्यक्ति स्वतंत्रता के खिलाफ है।

खुशी और चाहत : सफल व्यक्ति वे होते हैं, जो अपने जीवन में कुछ अच्‍छा चाहते हैं। अच्छा चाहने के लिए खुश रहना जरूरी है। यदि आपके जीवन में आपने जो चाहा, वह अभी तक मिला नहीं है तो आप उदास और निराश रहने लगेंगे जबकि ऐसा करने से आपने जो चाहा है, उसका पास आना और मुश्किल हो जाता है। खुशी और चाहत दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं। हमेशा खुश रहना सीखें। अभ्यास से यह संभव हो सकता है।

खुश रहेंगे तो आप जीवन में जो भी सहज रूप से चाहेंगे, वह मिलता जाएगा। अत: खुशी-खुशी सपने देखो, अपना लक्ष्य बनाओ, उसके लिए योजना बनाओ और कार्य करो। कार्य करते रहो, करते रहो और करते रहो। परिणाम की चिंता मत करो।

यदि परिणाम मनचाहा नहीं मिल रहा है ‍तो पता करें कि वह कौन-सी चीज है, जो आपको पीछे की तरफ खींच रही है फिर उससे अपना पीछा छुड़ाएं। पहले आप अपनी बाधा को हटाएं।

जानकारी ही बचाव है : कुछ ऐसे विषय हैं जिनके बारे में जानते रहना चाहिए, क्योंकि वे सभी के जीवन से जुड़े हुए विषय हैं जैसे कि दवाई, डॉक्टर, आयुर्वेद, टेक्नोलॉजी, संचार माध्यम, इंटरनेट, टैक्स, कानून, समाज, धन, यात्रा, ट्रैवल कंपनी, होटल, लॉज, तीर्थ स्थल, पर्यटन स्थल, धर्म, इतिहास, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, स्कूल, अस्पताल, शिक्षा, ऑफिस कार्य, शहर, भाषा, संस्कृति, शादी, समारोह, सरकारी सुविधाएं, जंगल, जानवर, समुद्र, पहाड़, नदी, गांव, किसी के द्वारा दी गई जानकारी, टिप्स, खास वाक्य, दोस्त, रिश्तेदार, नए कपड़े, किराने का सामान आदि ऐसी सैकड़ों बातें हैं।


Source : Shivam Sharma

कुछ भी खाओ अच्छी तरह से नहीं पचता। पाचन क्रिया को अच्छा कैसे करें?

पाचन क्रिया को सही करने के कुछ आसान से टिप्स दे रहा हूँ ।

  • खाना को अच्छे से चबा चबा कर खाएं ,ये बात सुनने में सामान्य लग रही हो लेकिन इसके फायदे जबरदस्त हैं, क्योंकि भोजन हमारे मुँह में जाते ही 50% पच जाता हैं ,बाकी का काम पेट में जाने के बाद होता हैं, अगर ठीक से भोजन को नहीं चबाया जाता हैं तो अंदर भोजन पचने में काफी मशक्कत करना पड़ता हैं ,जिससे पाचन शक्ति खराब हो जाती हैं ।
  • भोजन के बीच में एक दो घुट करकर पानी पीएं ,न एक बोतल पी लेना हैं ,और न ही बिल्कुल भी नहीं पीना हैं ।
  • खाना खाने के बाद कम से कम 100 कदम जरूर टहले जिससे अगर आंतों में फसा टुकड़ा सही जगह चला जाये । और 5 मिनट के लिए वज्रासन में जरूर बैठे ।
  • खाने के बाद एक चुटकी सौफ जरूर खाये इससे पाचन शक्ति में जबरदस्त फायदा आएगा ।
  • अपनी daily रूटीन में exercise को शामिल करें ।
  • दिन में कम से कम 5 लीटर पानी जरूर पियें ।
  • डब्बा बंद खाने को जितना हो सके इग्नोर करें ।
  • अपने भोजन में fruits को जरूर शामिल करें ।
  • अगर आपको कब्ज रहता हो तो रात में एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी से ले काफी फायदा होगा ।
  • और अंत में ज्यादा तनाव न ले जो है अभी हैं ,न अतीत है न भविष्य इसलिए वर्तमान को बेहतर बनाये ,और आनंद में रहे ।

धन्यवाद

Saturday, September 12, 2020

टेस्टोस्टेरोन का स्तर कैसे बढ़ा सकते हैं?

टस्टोस्टरोन का स्तर बढ़ाना पुरुषों के लिए बहुत आवश्यक होता है। यह पुरुष की सम्भोग शक्ति और बच्चा पैदा करने की शक्ति पर प्रभाव डालता है। आइए जानते हैं हम इसका स्तर कोंकैसे ब ढा सकते हैं

पालक

पालक को लंबे समय से सबसे अच्छा टेस्टोस्टेरोन में से एक माना जाता है पालक मैग्नीशियम का एक प्राकृतिक स्रोत है जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाता है। पालक में विटामिन बी 6 और आयरन भी होता है जो दोनों बेहतरीन टेस्टोस्टेरोन बूस्टर हैं।

बादाम

बादाम में उच्च मात्रा में खनिज जस्ता होता है जो कि जस्ता की कमी वाले लोगों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। जस्ता युक्त खाद्य पदार्थ खाने से इसके स्तर में बढ़ोतरी आती हैं।

नींबू

नींबू टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ हैं। इतना ही नहीं बल्कि इसमें विटामिन ए होता है जो टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन के लिए आवश्यक होता है और यह एस्ट्रोजन के स्तर को कम करने में मदद करता है जिसका मतलब है कि टेस्टोस्टेरोन अधिक प्रभावी हो सकता है।

केले

केले में ब्रोमेलैन नामक एक एंजाइम होता है जो टेस्टोस्टेरोन के स स्तरको बढ़ाने में मदद करने के लिए जाना जाता है। केले भी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने और एंटीऑक्सिडेंट को कम करने के लिए उत्कृष्ट होते हैं इसलिए सही भोजन बनाते हैं।

Friday, August 28, 2020

What are 5 habits that can improve my life

  1. Moderate exercise everyday will significantly improve your quality of life.
  2. Go to bed at a reasonable time, it will help you wake up on time and feel better on a daily basis.
  3. Eat healthy, with lots of fruits and vegetables. I've actually found that this becomes very easy once you force yourself to do it for a couple of days. It's very much a habit that you can simply pick up.
  4. Managing expectations. Disappointment is the root of most of our misery.
  5. Intermittent fasting. If you practice intermittent fasting, it’s really easy to go on with your life and not gain weight, especially if you’re 25+, which I guess is the main Quora demographic.

Monday, August 24, 2020

आपके पास मेरे लिए कुछ अनियमित सुझाव क्या हैं?

मैं आपको ऐसे कुछ सुझाव देना चाहता हूँ जो आपके दैनिक जीवन में लाभदायक होंगे:

टॉयलेट सीट पर 10 मिनट से ज्यादा समय न बिताएं।

मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि आज के जीवन में अधिकतर जवान लोग शौचालय में अपना फोन लेकर जाते हैं। कुछ लोग अखबार या किताब भी लेकर जाते हैं। टॉयलेट सीट पर बैठकर फोन इस्तेमाल करना अब आम बात हो गई है।

लेकिन अब सुनिए कि ऐसा करना हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है। टॉयलेट सीट पर लम्बे समय तक बैठे रहने से बवासीर (piles) हो सकती है। 10 मिनट से अधिक समय तक बैठने से मलाशय (rectum) में नसों पर बहुत दबाव पड़ता है। रोजाना इतने लम्बे समय तक बैठने से मल त्याग में भी रुकावट आने लगती है।

जब समस्या बढ़ जाती है, तो मल त्याग करना बेहद मुश्किल हो जाता है। तो शौचालय में फोन न लेकर जाएं, क्योंकि फोन में ध्यान देने से व्यक्ति लम्बे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठा रहता है। वैसे भी फोन को शौचालय में ले जाना एक गंदी आदत है।

सोने से पहले फोन को अपने पास न रखें।

स्मार्टफोन, टीवी, और लैपटॉप आदि सभी स्क्रीनों में से नीली किरणें निकलती हैं। ये नीली किरणें हमारे शरीर में ऐसे हार्मोन पैदा होने से रोकती हैं जिनसे हमें अच्छी नींद आती है। इनसे हमारे शरीर की जैविक घड़ी में गड़बड़ होती है, और हमारा नींद का चक्र खराब हो जाता है।

अच्छी नींद न मिलने से सरदर्द, तनाव, थकावट आदि जैसे लक्षण दिन में दिखने शुरू हो जाते हैं। सलाह ये है कि सोने से 1 घंटे पहले ही फोन को गुड नाईट बोल दें और फिर सुबह तक उसे हाथ न लगाएं।

Friday, January 31, 2020

Coronavirus- A new Danger to the society and how to deal with it

Hello Guys

China is suffering from coronovirus , a new kind of threat to the society. Death cases of about 200+ are already reported and thousands of people are in hospitals with infections.Its a new mutative virus which is changing it's form by the time experts find its remedy.

First we have to understand about coronavirus before finding about its preventive measures:

A coronavirus is a kind of common virus that causes an infection in your nose, sinuses, or upper throat. Most coronaviruses are not dangerous.

Often a coronavirus causes upper respiratory infection symptoms like a stuffy nose, cough, and sore throat. You can treat them with rest and over-the-counter medication. The coronavirus can also cause middle ear infections in children.

The symptoms of most coronaviruses are similar to any other upper respiratory infection, including runny nosecoughingsore throat, and sometimes a fever. In most cases, you won't know whether you have a coronavirus or a different cold-causing virus, such as rhinovirus.

But if a coronavirus infection spreads to the lower respiratory tract (your windpipe and your lungs), it can cause pneumonia, especially in older people, people with heart disease, or people with weakened immune systems.

Here are some Preventive Measures and Home Remedies for the Corona Virus:

1. To prevent infection from spreading, basic rules should be followed like washing hands regularly and covering the mouth and nose while coughing and sneezing.

2. Eat properly cooked meat and eggs. If possible avoid having non-vegetarian food during the outbreak.

3. Drink plenty of water in the event of infection. Boil water and cool it before use.

4. Use an air purifier mask or put a handkerchief on the mouth in case of sneezing.

5. Grind the leaves of Basil, Neem and Giloy to make juice. Take half a cup of it three times a day to strengthen immunity.

6. The juice of black pepper powder and neem-papaya leaves can be taken to increase immunity.

7. Boil one handful of Basil leaves and one teaspoon clove powder in one liter of water. Drink at intervals of 2 hours.

8. If the cough is accompanied with low grade fever, make a paste of black pepper powder, rock salt and honey. Take ½ tsp at 5 hour intervals.

9. Start the day with a rejuvenating Rasayana like Chyawanprash taken with cow's milk.


Sources :WebMed and Quora

Saturday, April 23, 2016

Very Very Important Health Tips

1. Answer phone calls with the left ear.
2. Don't take your medicine with cold water....
3. Don't eat heavy meals after 5pm.
4. Drink more water in the morning, less at
night.
5. Best sleeping time is from 10pm to 4 am.
6. Don’t lie down immediately after taking
medicine or after meals.

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